Ancient Civilizations 1:00

बच्चों के लिए प्राचीन कंक्रीट का रहस्य

1गुप्त ज्वालामुखी नुस्खा (रेसिपी)

प्राचीन रोमन सिर्फ़ महान सैनिक नहीं थे; वे मास्टर रसायनज्ञ (केमिस्ट) भी थे! जहाँ हम आधुनिक गगनचुंबी इमारतें ऐसे कंक्रीट से बनाते हैं जो लगभग 50 साल चलता है, वहीं रोमनों ने एक "सुपर-मटेरियल" बनाया जो 2,000 साल से ज़्यादा समय से टिका हुआ है। उनका गुप्त घटक पॉज़ोलना (pozzolana) नामक एक खास ज्वालामुखी राख थी, जो माउंट वेसुवियस के पास मिलती थी। इस राख को चूने और समुद्री पानी के साथ मिलाकर, उन्होंने एक रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू की जिससे पत्थर जैसा पदार्थ बना जो इतना मज़बूत था कि यह भूकंप और समुद्र की टकराती लहरों को भी बिना टूटे झेल सकता था।

2इमारतें जो खुद को ठीक करती हैं

सोचिए अगर आपकी साइकिल पर लगी खरोंच रात भर में अपने आप ठीक हो जाए! रोमन कंक्रीट में वास्तव में "स्वयं-मरम्मत" (self-healing) की शक्ति थी। कंक्रीट के अंदर छोटे सफेद टुकड़े होते हैं जिन्हें लाइम क्लास्ट्स (lime clasts) कहा जाता है। जब कोई छोटी दरार बनती है और बारिश का पानी अंदर रिसता है, तो वह इन चूने के टुकड़ों से टकराता है और एक नई रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू करता है। यह प्रक्रिया नए क्रिस्टल उगाती है जो एक जैविक पपड़ी (scab) की तरह दरार को भर देते हैं, जिससे संरचना पहले से भी ज़्यादा मज़बूत हो जाती है। यही कारण है कि दो हज़ार साल तक समुद्र के पानी से घिसने के बावजूद रोमन बंदरगाह और समुद्री दीवारें आज भी भूमध्य सागर में खड़ी हैं।

3असंभव का इंजीनियरिंग

इस प्राचीन रहस्य का सबसे बड़ा प्रमाण रोम का पैन्थियन है। लगभग 126 ईस्वी में बनकर तैयार, इसका विशाल गुंबद 142 फीट से ज़्यादा चौड़ा है और यह पूरी तरह से बिना सहारे वाले कंक्रीट से बना है। इसका मतलब है कि इसे ऊपर से पकड़े रहने के लिए अंदर कोई धातु की छड़ या सहारा नहीं है! इसे काम करने लायक बनाने के लिए, रोमन इंजीनियरों ने नीचे भारी ज्वालामुखी पत्थर और सबसे ऊपर प्यूमिस (pumice) नामक हल्के, हवा भरे पत्थरों का इस्तेमाल किया। आज भी, हमारे पास सभी आधुनिक कंप्यूटर और मशीनें होने के बावजूद, हम रोमन इमारतों को देखकर सीखते हैं कि उन्होंने चीज़ों को हमेशा के लिए कैसे बनाया।

वीडियो प्रतिलिपि

परिचय

प्राचीन रोमनों ने ऐसा कंक्रीट बनाया जो 2000 साल पहले बनाए जाने के मुकाबले आज और भी ज़्यादा मज़बूत है! उनकी गुप्त विधि में ज्वालामुखी की राख, चूना और समुद्री पानी का इस्तेमाल होता था, जो समय के साथ और सख़्त होता जाता है। आधुनिक कंक्रीट अक्सर केवल 50 सालों बाद ही टूटने लगता है, लेकिन पैन्थियन जैसी रोमन कंक्रीट की संरचनाएँ आज भी एकदम सही खड़ी हैं।

मुख्य तथ्य

क्या आप जानते हैं कि पानी के नीचे बना रोमन कंक्रीट नए खनिज उगाकर अपने आप दरारों को ठीक कर लेता है? क्या आप जानते हैं कि रोम में बना पैन्थियन गुंबद आज भी बिना किसी सहारे (unreinforced) का दुनिया का सबसे बड़ा कंक्रीट का गुंबद है? क्या आप जानते हैं कि रोमनों ने कंक्रीट इतना मज़बूत बनाया था कि उसे तोड़ना कई प्राकृतिक चट्टानों से भी ज़्यादा मुश्किल है?

सोचिए

आपके हिसाब से प्राचीन रोमन हज़ारों साल तक चलने वाली कंक्रीट की इमारतें कैसे बना पाए, जबकि हमारी आधुनिक इमारतें कुछ दशकों बाद ही मरम्मत माँगने लगती हैं?

उत्तर

रोमनों ने गलती से ज्वालामुखी की राख और चूने का उपयोग करके स्वयं-मरम्मत (self-healing) करने वाला कंक्रीट खोज लिया! जब दरारें पड़ती हैं, तो बारिश का पानी बचे हुए चूने के कणों को सक्रिय कर देता है जो कैल्शियम कार्बोनेट के नए क्रिस्टल उगाकर उन दरारों को भर देते हैं। आधुनिक कंक्रीट जल्दी सेट होने पर ज़्यादा ध्यान देता है, बजाय कि लंबे समय तक टिकने पर, इसलिए वे इस अद्भुत स्वयं-मरम्मत क्षमता को खो देते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोमन कंक्रीट असल में किस चीज़ से बना होता है?

रोमन कंक्रीट, जिसे ओपस सीमेंटिसियम (opus caementicium) के नाम से जाना जाता है, ज्वालामुखी की राख, चूने और समुद्री पानी का मिश्रण था। उन्होंने मज़बूत नींव बनाने के लिए भारी ज्वालामुखी पत्थर या ऊँचे गुंबद बनाने के लिए हल्का प्यूमिस पत्थर मिलाया करते थे।

रोमनों ने पानी के अंदर इमारतें कैसे बनाईं?

रोमनों ने खोजा कि उनका खास ज्वालामुखी कंक्रीट समुद्री पानी में जमने और और भी सख़्त होने लगता है। इसने उन्हें विशाल बंदरगाह और घाट बनाने में मदद की जो 2,000 साल की लहरों को झेल चुके हैं, जबकि आधुनिक कंक्रीट के घाट कुछ ही दशकों में टूट जाते हैं।

पैन्थियन का गुंबद इतना प्रसिद्ध क्यों है?

पैन्थियन का गुंबद दुनिया का सबसे बड़ा बिना सहारे वाला कंक्रीट का गुंबद है, जिसका मतलब है कि अंदर कोई स्टील सपोर्ट बीम नहीं है। यह लगभग 2,000 वर्षों से इसलिए टिका हुआ है क्योंकि कंक्रीट बहुत मज़बूत है और इंजीनियरों ने बीच के छेद (ओकुलस) की ओर बढ़ते हुए हल्के पदार्थों का उपयोग किया।

क्या हम आज रोमन कंक्रीट बना सकते हैं?

हाल ही में वैज्ञानिकों ने प्राचीन खंडहरों के अंदर खनिजों का अध्ययन करके 'गुप्त नुस्खा' पता लगाया है। इंजीनियर अब इन प्राचीन तरीकों का उपयोग करके आधुनिक कंक्रीट बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो पर्यावरण के लिए बेहतर हो और आज इस्तेमाल होने वाले कंक्रीट से सैकड़ों साल ज़्यादा चले।

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